मोतीझरा का आयुर्वेदिक इलाज, लक्षण, आहार और दवा

चित्र में मोतीझरा के कारण थर्मामीटर लिए लड़की
मोतीझरा का आयुर्वेदिक इलाज

मोतीझरा या टाइफाइड, सालमोनेला टायफी बैक्टीरिया द्वारा फैलता है। सामान्यतः यह गंदा दूषित खानपान अथवा गंदे पानी से शरीर में प्रवेश करते है। मोतीझरा का आयुर्वेद में अचूक उपचार है। टाइफाइड के रोगियों को नीचे वर्णित आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन करना चाहिए:

मोतीझरा का आयुर्वेदिक इलाज

आयुर्वेद में इसे ज्वर का एक प्रकार माना गया है। कुछ उपयोगी उपचार हैं –

  • गिलोय का रस या काढ़ा – बुखार कम करे और इम्युनिटी क्षमता बढ़ाता है।

  • काली मिर्च और तुलसी का काढ़ा – टायफाइड बैक्टीरिया से लड़े।

  • शहद और आंवला – शरीर को विटामिन C  और ताकत प्रदान करते हैं।

  • पपीते का रस – बुखार कम करने और पाचन सुधारने में मदद करता है।

  • अदरक और दालचीनी काढ़ा – इंफेक्शन को कम करने और शरीर की सूजन दूर करने में सहायक।

  • त्रिभुवन कीर्ति रस एक गोली सुबह तथा एक गोली शाम को भोजन उपरांत लेवे।
  • महासुदर्शन घन वटी की दो गोली सुबह और शाम को भोजन उपरांत ले सकते है।
  • 20 ml कुमारी आसव सुबह  और  शाम भोजन से 15 मिनटपानी  के साथ बराबर मात्रा में ले।
  • त्रिफला टेबलेट या घनवटी की एक गोली सुबह-शाम भोजन के बाद ले।

काम से कम 7 से 21 दिन तक प्रतिदिन इन सभी दवाइयों का सेवन करें मोतीझरा पूर्ण रूप से ठीक हो जायेगा। लेकिन टायफाईड(Typhoid) अगर सात दिनों के अंदर रहत नहीं दे तो डॉक्टर को अवश्य दिखाए।

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मोतीझरा की दवा (Ayurvedic Medicines)

  • संजीवनी वटी
  • त्रिकटु चूर्ण

  • गिलोय घनवटी
  • च्यवनप्राश

  • शुद्ध आंवला रस

मोतीझरा में क्या खाना चाहिए?

बीमारी के दौरान पचने में हल्का और पौष्टिक भोजन करना चाहिए –

  • खिचड़ी, मूंग दाल का सूप, दलिया,

  •  बेल का शरबत और नारियल पानी

  • अनार, सेब, पपीता जैसे हल्के फल

  •  हर्बल चाय और गुनगुना पानी

  • वेजिटेबल सूप

मोतीझरा की पहचान कैसे करें?

मोतीझरा के लक्षण इस प्रकार है –

  • 7–14 दिन तक लगातार तेज बुखार रहना

  • शरीर में दर्द और कमजोरी

  • वजन घटना
  • भूख न लगना और सिरदर्द

  • पेट दर्द या पेट फूलना

  • शरीर में कंपन
  •  मितली आना
  • कब्ज(दस्त) होना

  • पसीना आना
  • जीभ पर सफेद परत जमना

  • आंतों में सूजन होना
  • त्वचा पर गुलाबी रंग के दाने (rose spots) निकलना

निष्कर्ष

मोतीझरा (Typhoid fever) दूषित पानी और भोजन से फैलने वाला रोग है। इसकी पहचान बुखार, कमजोरी, भूख न लगना और पेट की समस्या से की जा सकती है। आयुर्वेदिक दवाएं, गिलोय, तुलसी, आंवला और संतुलित आहार से शरीर को ताकत मिलती है और रोग की गंभीरता कम होती है। हालांकि, यह बैक्टीरिया जनित रोग है, इसलिए सही समय पर चिकित्सक से दवा और इलाज लेना अनिवार्य है।

 

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