पतंजलि एकांगवीर रस के क्या फायदे हैं? इसकी खुराक, price और दुष्प्रभाव के बारे में जाने

पतंजलि एकांगवीर रस के क्या फायदे और उपयोग हैं?
एकांगवीर रस एक आयुर्वेदिक टेबलेट दवा है जो मुख्यतः पक्षघात(paralysis), सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस, साईटिका, कपकपी के उपचार में उपयोग की जाती है।
Ekangveer Ras Uses in Hindi
इसके अलावा यह ब्राचियल न्यूराल्जिया, हेमिप्लेजिया जैसी न्यूरो-मस्कुलर के लिए इस्तेमाल की जाती है।
एकांगवीर रस की खुराक क्या है?
दिव्य एकांगवीर रस को 125 से 370 मिली ग्राम तक भोजन के पहले या बाद में दिन में दो बार पानी के साथ चिकित्सक परामर्श पर ले सकते है। सामान्यतः एलोपैथिक दवा लेने के आधे घंटे बाद आयुर्वेदिक दवा ली जा सकती है। यदि आप अंग्रेजी दवा ले रहे है तो बिना डॉक्टर से पूछे कोई आयुर्वेदिक दवा न ले।
एकांगवीर रस की मुख्य सामग्री
शुद्ध गंधक, शुद्ध पारद, नारद भस्म, अभ्रक भस्म, पिप्पली, अदरक प्रकंद, कंटालौह भस्म, हरीतकी, विभीतकी, अमलकी, कुष्ट शिग्रु, त्रिकूट, चित्रक, धतूरा, अर्का, आंवला, भृंगराज आदि के बारीक़ पाउडर को रास और कषाय मिलकर पेस्ट बनाया जाता है। इसके बाद इसकी गोलिया या टैबलेट बनाते है।
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एकांगवीर रस के नुकसान
पतंजलि दवा दिव्य एकांगवीर रस का कभी तक कोई खास साइड इफ़ेक्ट देखने को नहीं मिला है। वात और पित्त दोष में इसका इस्तेमाल वर्जित हो सकता है। लेकिन इस आयुर्वेदिक दवा का उपयोग तभी करे जब चिकित्सक ने कहा हो।
वही बच्चो, प्रेग्नेंट और स्तनपान कराने वाली महिलाये इसका उपयोग सावधानीपूर्वक डॉक्टरी सलाह पर ही करे।