Menopause Ka Ayurvedic Ilaj-मेनोपॉज का आयुर्वेदिक इलाज करे लक्षणों को काबू जानिए कैसे?
मेनोपॉज का आयुर्वेदिक इलाज-महिलाओं में बढ़ती उम्र के साथ ही उनकी बॉडी में कई शारीरिक बदलाव होने लगते है जो मुख्यतः हार्मोनल परिवर्तन के कारण होते यही। इसे एजिंग भी कहा जा सकता है। इसी में एक स्टेज मेनोपॉज(menopause) की होती है जिसमे पीरियड्स बंद हो जाते है जिससे शरीर को कई समस्याओ से जूझना पड़ता है लेकिन आयुर्वेदिक इलाज के द्वारा इन समस्याओं के लक्षणों से छुटकारा पा सकते है।

पीरियड्स या मासिक धर्म बंद होने को रजोनिवृत्ति की स्थिति नहीं कहते है। मेनोपॉज का टाइम महिलाओं में 40 प्लस की उम्र के आसपास शुरू होता है। जब एक साल तक आपका मासिक धर्म नहीं आए तो इसे रजोनिवृत्ति या मेनोपॉज कहते हैं। ऐसे में महिलाओं के हाॅर्मोनस में बदलाव के साथ ही ओवुलेशन बंद हो जाता है।
मेनोपॉज (Menopause) प्रोसेस में महिला गर्भवती नहीं हो सकती हैं, क्योंकि अंडाशय (ovary) के एंग रिलीज करने वाले फॉलिकल्स (Follicles) फॉलिकल्स की मात्रा कम होने लगती है। मेनोपॉज शरूर होने से पहले आपके माहवारी में कुछ असामान्यता के लक्षण नजर आने लगते हैं। जब इन फॉलिकल्स का विकास पूरी तरह बंद हो जाता है तब मासिक धर्म आना भी बंद हो जाता है।
मेनोपॉज (Menopause) स्थिति के लक्षण
- पसीना अधिक आना आदि।
- अनिद्रा (Insomnia)
- यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI)
- वजायना का ड्राई होना
- यूरिन से जुडी प्राब्लम
- मेटाबॉलिज्म धीरे होना (Slow Metabolism)
- अवसाद (Depression)
- बालों का अधिक झड़ना
- वजन में बढ़ोतरी (weight Gain)
- ब्लड प्रेशर लो होना (Low Blood Pressure)
- हार्ट बीट बढ़ना या घटना
- कामेच्छा या यौन इच्छा में कमी (libido or Decreased sexual desire)
- जोड़ों में दर्द (Joint Pain)
पेरिमेनोपॉज (Pre-menopause) क्या है ?
यह स्थिति मेनोपॉज के पहले आती है जब महिला की आयु 40 प्लस होती है तो उसके पीरियड्स का चक्र कम हो जाते है साथ ही ब्लड का फ्लो भी हल्का हो जाता है इसे पेरिमेनोपॉज कहते है 45-50 आयु आते-आते पीरियड्स बंद ही हो जाते है जिसे मेनोपॉज कहते है। 40 आयु के पहले भी कुछ महिलाओं में रजोनिवृत्ति (menopause) लेकिन यह दुर्लभ होता है।
आयुर्वेद में, रजोनिवृति को वात दोष में शामिल किया जाता है और कहा जाता है यदि किसी महिला को एक वर्ष तक ,मासिक चक्र नहीं आते है तब रजोनिवृत्ति की शुरुआत तब होती है।
अनियमित पीरियड्स के लिए पतंजलि आयुर्वेदिक मेडिसिन
मेनोपॉज का आयुर्वेदिक इलाज :
गुग्गुल (Guggul)
रजोनिवृत्ति में महिला के शरीर के वजन भी बढ़ता या घटता है। ऐसी स्थिति में थायराइड, ब्लड प्रेशर कण्ट्रोल रखना बहुत जरुरी है। गुग्गुल शक्तिशाली गणों से युक्त जड़ी-बूटी है जो महिलाओं को रजोनिवृत्ति के दौरान बढ़ते वजन और अन्य शारीरिक स्थितियों से निपटने में सहायक हो सकता है।
अर्जुन (Arjuna)
एस्ट्रोजन के लेवल कम होने के कारण महिलाओं के शरीर में ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और वसा को मैनेज करना कठिन हो जाता है। अर्जुन आयुर्वेद में एक जानी मानी जड़ी-बूटी है, जो हार्ट कार्य की क्षमता के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। महिलाओं में रक्तचाप को सामान्य बनाए रखने और हृदय से जुडी बीमारियों को दूर करने लिए इस हर्ब का सेवन करना सहायक हो सकता है।
इलायची (Cardamom)
रजोनिवृत्ति (menopause) के समय महिलाओं की प्रजनन क्षमता और हाॅर्मोनस लेवल में गिरावट आने होने लगती है। जिसका नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है। में कई गुण होते हैं, जो मेनोपॉज की प्रक्रिया को धीमा करने में इलायची कुछ गुण विद्यमान होते है। यह ब्रेन फंक्शन को बेहतर करने, म मेन्टल स्ट्रेस में आराम देने के अलावा कई बॉडी से सम्बंधित प्रॉब्लम्स को दूर करने में मदद करती है।
सौंफ (Fennel)
आयुर्वेद के menopause के समय में वात दोष बढ़ने के कारण कफ और पित्त दोष असंतुलन हो जाता है। अपने शीतल गुण के वजह से सौंफ शरीर का तापमान और पसीने को कण्ट्रोल करता है वही इसके कुछ नेचुरल प्रॉपर्टीज वात दोष को बैलेंस करने में मदद करते है।
मेनोपॉज को कैसे मैनेज करें
मेनोपॉज के दौरान महिला शरीर में एस्ट्रोजन की कमी हो जाती है जिस वजह सी कई तरह शारीरिक प्रॉब्लम्स होती है जैसे – ऑस्टियोपोरोसिस, योनि का सूखापन, हाई ब्लड प्रेसर आदि।
- इस समय कैल्शियम का सेवन असरदार हो सक्ता डॉक्टरी सलाह पर कैल्शियम युजत आहार या सप्लीमेंट्स ले सकते है।
- अपनी डाइट पर कम शुगर, कम ऑयल, साबुत अनाज, सब्जियां और कई प्रकार के रंग वाले फल और सैचुरेटेड फैट को शामिल करना चाहिए।
- प्रतिदिन 30 से 40 मिनट टहलें या व्यायाम करें।
- विटामिन डी, पोटेशियम, मैग्निशियम, फॉस्फोरस, डेयरी उत्पाद की पर्याप्त मात्रा ले।
निष्कर्ष
मेनोपॉज महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण स्थिति है अगर इसके लक्षण अधिक परेशांन करते है तो कृपया डॉक्टर को दिखाए वही बताये गए उपायों को अपनाने से पहले भी चिकित्सक परार्मश जरुरी है।