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प्राकृतिक चिकित्सा क्या है इसके प्रकार, सिद्धांत, तत्व और लाभ

प्राकृतिक चिकित्सा(Naturopathy) तन और मन सहित समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण को अपनाती है। प्राकृतिक चिकित्सा घरेलु उपाय, योग, व्यायाम, स्वस्थ आहार, हर्बल चिकित्सा, धूप, तनाव प्रबंधन और स्वस्छता और तजा पानी के नीव पर आधारित है जो स्वस्थ जीवनशैली जीने की प्रेरणा देती है। इस आर्टिकल में हम जानेंगे प्राकृतिक चिकित्सा के प्रकार, सिद्धांत और लाभ। 

चित्र में प्राकृतिक चिकित्सा के जरिये औषधि बनता व्यक्ति
प्राकृतिक चिकित्सा

प्राकृतिक चिकित्सा के जरिये इम्मून सिस्टम की कार्य छमता बढ़ाना मुख्य उद्देश्य होता है जिससे रोगो के लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है इसके अलावा संतुलित भोजन अपनाने और पूरे परिवार की हेल्थ पर ध्यान रखना है।   

प्राकृतिक चिकित्सा के प्रकार एवं विधियां

चिकित्सा का प्रकार उपयोग के तरीके मुख्य फायदे
जल चिकित्सा (Hydrotherapy) ठंडे-गर्म पानी की पट्टियाँ, स्नान, स्टीम बाथ, एनिमा रक्तसंचार सुधारना, विषैले तत्व बाहर निकालना, सूजन कम करना
मिट्टी चिकित्सा (Mud Therapy) मिट्टी की पट्टी, मिट्टी स्नान त्वचा की चमक बढ़ाना, गर्मी सोखना, शरीर को ठंडक पहुँचाना
आहार चिकित्सा (Diet Therapy)  अंकुरित अनाज, संतुलित आहार, कच्चा भोजन, फलाहार, जूस रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना, पाचन सुधरना, शरीर को प्राकृतिक पोषण देना
सूर्य चिकित्सा (Sun Therapy)  सूर्य नमस्कार, सूर्य स्नान, सूर्य जल, विटामिन D की आपूर्ति, मानसिक ऊर्जा बढ़ाना, रोगाणु नाशक प्रभाव,
वायु चिकित्सा (Air Therapy) ताजी हवा में श्वसन क्रिया, प्राणायाम फेफड़ों की क्षमता बढ़ाना, मन को शांत करना, रक्त शुद्ध करना
योग और ध्यान (Yoga & Meditation)  ध्यान, योग निद्रा, आसन, प्राणायाम तनाव मुक्ति, शरीर व मन का संतुलन, मानसिक शांति
मालिश चिकित्सा (Massage Therapy) प्रेशर पॉइंट मसाज, हर्बल ऑयल से मालिश  रक्त प्रवाह सुधारना, मांसपेशियों की जकड़न दूर करना, आराम पहुंचाना
उपवास चिकित्सा (Fasting Therapy) नींबू पानी उपवास, फल उपवास, जल उपवास वजन संतुलित रखना, शरीर को डिटॉक्स करना, पाचन शक्ति सुधारना
अरोमा चिकित्सा (Aromatherapy) हर्बल फूलों और फूलों की सुगंध नींद सुधारना, तनाव कम करना, मानसिक सुकून देना
चुंबक चिकित्सा (Magnet Therapy) शरीर पर चुंबक का इस्तेमाल ऊर्जा संतुलन करना, दर्द कम करना, गठिया व रक्तचाप में सहायक

 

पंचकर्म चिकित्सा के लाभ, खर्च और संभावित नुकसान की पूरी गाइड

प्राकृतिक चिकित्सा के 10 सिद्धांत(Principles of Naturopathy)

  1. प्रकृति एक उपचारक है (Nature Heals)
    • शरीर में रोगो को ठीक करने की स्वयं क्षमता होती है। प्राकृतिक चिकित्सा इस शक्ति को जगाने ककर्य करती है।
  2. रोगो का दमन नहीं बल्कि निवारण (Do not Suppress Disease but Eliminate It)
    • बीमारियों के लक्षणों जड़ से निकालने का प्रयास किया जाता है न की दबाने का।
  3. रोग द्वारा शरीर की सफाई  (Disease is a Process of Cleansing)
    • रोग से शरीर के टॉक्सिक्स पदार्थ निकाले जाते है इसलिए रोगो के लक्षणों को दबाये नहीं।
  4. रोगों का मूल कारण सिर्फ एक है (All Diseases Have One Root Cause)
    •  असंतुलित जीवनशैली, गलत खानपान, और विषाक्त तत्व अनेक रोगों की जड़ हैं।
  5. उपचार का केवल एक ही तरीका है (There is Only One Treatment)
    • शरीर को विषमुक्त (Detoxify) रख कर उसकी नेचुरल पावर को बैलेंस करना मुख्य ही  उपचार है।
  6. आहार औषधि है (Food is Medicine)
    • स्वच्छ, पौष्टिक, शुद्ध, सात्विक और प्राकृतिक आहार ही सबसे बड़ा और सरल उपचार है।
  7. रोग प्रतिरोधक क्षमता पर जोर  (Strengthen Immunity)
    • प्रतिरोधक छमता पर ध्यान केंद्रित करना ही प्राकृतिक चिकित्सा का मुख्य उद्देश्य है।
  8. संतुलित जीवनशैली  (Balanced Lifestyle)
    • ध्यान, योग, व्यायाम, अच्छी नींद और प्रकृति के साथ बेहतर सामंजस्यपूर्ण सम्बन्ध स्थापित करना एक अच्छे लाइफस्टाइल की धारणा है।
  9. तन और मन का संबंध (Mind-Body Connection)
    • मन और शरीर का शुद्ध सम्बन्घ रखना जरुरी है इससे नकारात्मक विचार और मानसिक तनाव का प्रबंधन किया जा सकता है।
  10. संपूर्णता का एहसास (Treat the Person as a Whole)
  • केवल शरीर को ही स्वस्थ नहीं बल्कि आत्मा और मन के बीच स्वस्थ और संतुलित सम्बन्ध स्थापित करना लक्ष्य है।

संतुलित आहार(balance diet) किसे कहते हैं यह क्यों आवश्यक है

प्राकृतिक चिकित्सा (Naturopathy / Nature Cure) के पाँच मूलभूत तत्व जिन्हे पंचमहाभूत (भी माने जाते हैं पर ही पूरी पद्धति टिकी हुई है। जो इस प्रकार है –

  • पृथ्वी (Earth) – मिट्टी,  शरीर की हड्डियाँ, आहार, मांस, अंग आदि।
    मिट्टी से उपचार, मिट्टी स्नान, मिट्टी का लेप आदि।
  • जल (Water) – शरीर में रक्त,पसीना, रस आदि।
    जल उपचार, स्नान, गीले पट्टे, एनिमा आदि।
  • अग्नि (Fire) – ऊर्जा, शरीर का ताप, पाचन शक्ति ।
    भाप स्नान, सूर्य स्नान, योगासन व प्राणायाम।
  • वायु (Air) – श्वास-प्रश्वास, प्राणवायु, ।
    शुद्ध वायु में रहना, प्राणायाम, खुले वातावरण में व्यायाम।
  • आकाश (Ether/Space) – शरीर की रिक्त जगहें, मन की शांति।
    ध्यान, मौन, उपवास और मानसिक शुद्धि।

प्राकृतिक चिकित्सा (Naturopathy) के लाभ बहुत व्यापक माने जाते हैं, क्योंकि यह प्रकृति के सिद्धांतों और पंचमहाभूतों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) पर आधारित है। इसके मुख्य लाभ इस प्रकार हैं –

 प्राकृतिक चिकित्सा के लाभ

  1. बिना दुष्प्रभाव के उपचार
    • नेचुरोपैथी में दवाओं का अधिक उपयोग नहीं किया जाता है इसलिए यह उपचार दुष्प्रभाव रहित होता है।
  2. रोगों को जड़ से निकालना 
    • इसमें किया जाने वाला उपचार बीमारियों के लक्षणों को दबाता नहीं है बल्कि उनका जड़ स इलाज करता है।
  3. प्रतिरोधक क्षमता कप बढ़ाना 
    • यह बॉडी में हेलिंग पावर को जाग्रत करने के लिए रोग प्रतिरोधक छमता में वृद्धि करता है।
  4. शरीर और मन का संतुलन 
    • ध्यान, व्रत और प्राणायाम के जरिये स्थिरता अउ संतुलन स्थापित करने में मदद मिलती है।
  5. प्राकृतिक जीवनशैली को प्रोत्साहन 
    • शुद्ध वायु, आहार, सूर्य की ऊर्जा और स्वच्छ जल से प्राकृतिक, स्वस्थ और संतुलित  जीवन बनाया जा सकता है।
  6. दीर्घकालिक फायदे 
    • लाइफस्टाइल में सुधार करके उच्च रक्तचाप, मधुमेह, गठिया  मोटापा जैसे क्रॉनिक रोगों से बचाव करने में सहायता मिलती है।
  7. सस्ता और सुलभ उपचार
    • इसमें महंगी दवाइयों या ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं होती, सामान्य साधनों से उपचार संभव है।
  8. शरीर की सफाई (डिटॉक्सिफिकेशन)
    • जल चिकित्सा, मिट्टी चिकित्सा, उपवास आदि से शरीर के विषैले तत्व और गंदगी बाहर निकलते हैं।

निष्कर्ष:
इस लेख में प्राकृतिक चिकित्सा के प्रकार तत्व, सिद्धांत और लाभ के बार में सामान्य जानकारी दी गयी है यदि इनके द्वारा कोई भी उपचार करते है तो कृपया किसी अच्छे प्राकृतिक चिकित्सक से संपर्क करे।

 

 

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