क्या आयुर्वेद में सिकल सेल रोग ठीक हो सकता है? इसके लक्षण और कारण

सिकलिंग बीमारी का इलाज क्या है ?
सिकल सेल रोग (SS) एससीडी एक आम जेनेटिक रक्त विकार है जो रेड ब्लड सेल्स लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन असमान्य हो जाता है जिससे ब्लड सर्कुलेशन में रुकावट बनती है। ऐसे में एनीमिया, इन्फेक्शन जटिलताएं हो सकती हैं।
हीमोग्लोबिन एक जरुरी अनु है जो लाल रक्त कोशिकाओं में प्रोटीन के रूप में मौजूद होता है और यह छोटी वाहिकाओं के जरिये टिश्यूज और अन्य अंगो तक पूरे बॉडी में ऑक्सीजन पहुंचाता है।
जब हीमोग्लोबिन असमान्य हो जाता है तो इसे हीमोग्लोबिन एस कहते है और इसके वजह से रेड ब्लड सेल्स कठोर और अर्धचंद्राकार या सिकल के सामान दिखाई देता है। इस तरह की लाल कोशिकाएं अधिक समय तक नहीं टिक पाती है और रक्त की कमी होने लगती है।
सिकल सेल के 3 प्रकार क्या हैं?
सिकल सेल रोग (sickle cell disease) माता-पिता से मिले जीन के आधार पर कई प्रकार के हो सकते है जिनमें मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते है –
हीमोग्लोबिन एससी (HBSC)
एचबीएससी मध्यम प्रकार का सिकल रोग है जो करीब 25% लोगों प्रभावित कर सकता है। माता-पिता से हीमोग्लोबिन एस जीन वाले लोगो को विरासत में मिलता है।
हीमोग्लोबिन एसएस (HBSS)
एचबीएसएस सिकल सेल का एक गंभीर रूप है, जिससे तकरीबन 65% लोगों प्रभावित होते है। ऐसे में लोगो में विरासत से हीमोग्लोबिन एस से प्रारूप या एन्कोडेड जीन मिलता है। जिससे पूरा हीमोग्लोबिन या अधिकांश असामान्य होता है ऐसे में क्रोनिक एनीमिया हो सकता है।
हीमोग्लोबिन बीटा थैलेसीमिया (HbS)
यह अपने माता-पिता से हीमोग्लोबिन S जीन वाले लोगों को से विरासत में मिलता है। यह बीटा थैलेसीमिया नाम का एक असामान्य प्रकार होता हैं जो प्रकार का होता है:
- एचबीएस बीटा प्लस: सकिल रोग से पीड़ित तकरीबन लगभग 8% लोगों इससे प्रभावित हो सकते है और यह हल्का से लेकर माध्यम हो सकता है।
- एचबीएस बीटा शून्य: करीब दो प्रतिशत लोग इससे प्रभावित हो सकते है और यह माध्यम से लेकर गंभीर हो सकता है।
इसके अतिरिक्त भी इसके अन्य रेयर उपक्रम भी है जैसे- हीमोग्लोबिन एसओ (HbSO), हीमोग्लोबिन एसडी (HbSD) शामिल हैं। इनमें से किसी भी के भी साथ एक दूसरा जीन जेनेटिक रूप से मिलता है जो किसी असमान्य जीन के साथ एन्कोड होता है।
क्या आयुर्वेद में सिकल सेल ठीक हो सकता है?
वैसे तो सकिल सेल रोग का घरेलू उपचार नहीं है लेकिन अपनी लाइफस्टाइल से इसमें सुधर कर सकते है वही आयुर्वेद में कुछ उपाय मौजूद है जो सकिल रोग के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते है क्योंकि भी रोग या बीमारी दोषो के असंतुलन से अधिक प्रभावित होता है।
इसी में एक बीज दोष जो रक्त वाहन करने वाले स्रोतों के कार्य को प्रभावित करते है जिस वजह से प्लेटलेट्स की छमता कम हो जाती है।
आयुर्वेदिक दवाओं के द्वारा हीमोग्लोबिन के उत्पादन में वृद्धि और ऊतकों की मदद को बढ़ावा देना होता है।
योगराज गुग्गुल:
आयुर्वेदिक दवाओं में प्रसिद्ध योगराज गुग्गुल का सेवन सूजन और जोड़ों के दर्द से राहत को कम करने के लिए किया जाता है।
लक्ष्मि विलासरस:
इस आयुर्वेदिक दवा से प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा मिलने के साथ शरीर मजबूत होने में मदद करती है।
त्रिफला:
पुनर्नवा:
यह चमत्कारी जड़ी बूटी शरीर में सूजन कम करने और मौजूद अतिरिक्त तरल पदार्थ को निकालने में मदद करती है।
अश्वगंधा:
इस ताकतवर जड़ी बूटी से स्ट्रेस कम होता है और शरीर ऊर्जावान होता है।
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सिकल सेल रोग का सबसे आम पहला लक्षण क्या है?
कई बार डिहाईड्रेशन और अधिक शारीरिक मेहनत करने वालो में सिकल सेल रोग के लक्षण तीव्र हो सकते है।
5-6 महीने की उम्र के बच्चो में सिकल सेल रोग के लक्षण दिखने लगते है। लेकिन हर व्यक्ति में लक्षण माध्यम तीव्र हो सकते है। जैसे –
- एनीमिया
- कमजोरी
- हाथ या पेअर में सूजन और दर्द
FAQs
क्या ठंडा पानी पीना सिकल सेल के लिए अच्छा है?
सिकल सेल रोग वालो को अधिक ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए इससे उनका रोग ट्रिगर हो सकता है। इससे रेड ब्लड सेल्स सिकुड़ जाती है लेकिन नार्मल पानी पर्याप्त मात्रा में पिए क्योंकि इस दौरान डिहाईड्रेशन भी नहीं होना चाहिए।
स्किल सेल रोग का वाहक कौन हैं?
ऐसा व्यक्ति जिसके बॉडी में स्किल सेल का एक जीन मौजूद होता है लेकिन उसे किसी भी प्रकार से स्किल सेल रोग नहीं हुआ होता है। ऐसे लोगो को सिकल सेल रोग के वाहक कहते है।
क्या दूध सिकल सेल के मरीजों के लिए अच्छा है?
लो फैट वाला दूध सकिल रोग वाले मरीज ले सकते है क्योंकि इसमें कैल्शियम भी पाया जाता है क्योंकि कुछ लोगो को एलर्जी हो स्की यही इसलिए डॉक्टरी सलाह जरुरी है।
सिकल सेल का मरीज कितने साल तक जीवित रह सकता है?
सिकल सेल रोग का उपचार क्या है?
सिकल सेल रोग के उपचार के लिए एंटीबायोटिक दवाओं के साथ जीन थेरेप, बोन मैरो ट्रासंफ जिन बच्चो को तीव्र सकिल रोग होता है उन्हें पांच वर्ष का होने ताल एक दिन में दो दफा दवा देनी पद सकती है।
निष्कर्ष
इस लेख में सकिल सेल रोग का आयुर्वेदिक इलाज के बारे में सामान्य जानकारी प्रदान की गयी है जो इसके लक्षणों को कम करने का कार्य कर सकती है लेकिन यह कोई परमानेंट इलाज नहीं है इसलिए इसनका उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ले।